रावण ने तपस्या कर प्राप्त किए वरदान, अयोध्या में गूंजी चारों राजकुमारों के जन्म की खुशियां।
वृंदावन के कलाकारों ने रामलीला में किया रावण तपस्या, मेघनाथ विजय और श्रीराम जन्म का मनोहारी मंचन।
सितारगंज। श्री रामलीला कमेटी रजि. सितारगंज की ओर से आयोजित रामलीला में वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा विभिन्न प्रसंगों का मनोहारी मंचन किया जा रहा है। कलाकारों ने रावण, कुंभकरण और विभीषण की तपस्या से लेकर मेघनाथ की इंद्र पर विजय तथा अयोध्या में चारों राजकुमारों के जन्म तक की लीला का सुंदर मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि रावण अपने दोनों भाइयों कुंभकरण और विभीषण के साथ वन में भगवान की तपस्या करने जाता है। तीनों भाइयों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें वरदान देते हैं। वरदान प्राप्त करने के बाद रावण लंका का राजा बनकर शासन करने लगता है। वहीं, कुंभकरण छह महीने तक सोने का वरदान प्राप्त करता है, जबकि विभीषण भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है।
इसके बाद मेघनाथ स्वर्ग पर आक्रमण कर इंद्रदेव को पराजित कर देता है और सभी देवताओं को बंदी बनाकर रावण के दरबार में ले आता है। रावण देवताओं को अलग-अलग कार्यों में लगा देता है। कलाकारों ने इस प्रसंग का जीवंत मंचन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
वहीं, दूसरी ओर अयोध्या में महाराज दशरथ के कोई संतान न होने के कारण वे चिंतित रहते हैं। वे महर्षि वशिष्ठ के पास पहुंचकर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। महर्षि वशिष्ठ उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति होने का आशीर्वाद देते हैं। इसके बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम सहित चारों राजकुमारों का जन्म होता है। चारों राजकुमारों के जन्म से पूरी अयोध्या में खुशियां छा जाती हैं और उत्सव मनाया जाता है।
इस अवसर पर राकेश त्यागी,भीमसेन गर्ग, पवन अग्रवाल, संदीप गुप्ता, सोनू,आशीष पांडेय, राजेंद्र सिंह चौहान, भगवान सिंह भंडारी, अमित रस्तोगी, बिंदेश जायसवाल सहित कमेटी के कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
